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रूपया राम हो गया है / केदारनाथ अग्रवाल

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रूपया राम हो गया है
धर्म की सीता को आराम हो गया है
गाँव घर में कीर्तन सरनाम हो गया है
मजूर की बेटी गीता का नाम
बदनाम हो गया है

रचनाकाल: ११-०३-१९६८