भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता है / बालस्वरूप राही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता है
सहे आघात जो हँसकर वही इंसान होता है ।

लगाकर कल्पना के पर उड़ा करते सभी नभ पर
शिला से शीश टकराकर मुझे अभिमान होता है ।

सुबह औ' शाम आ-आ कर लगाता काल जब चक्कर
धरा दो साँस में क्या है तभी यह ज्ञान होता है ।

विदा की बात सुनकर मैं बहक जाऊँ असंभव है
जिसे रहना सदा वह भी कही मेहमान होता है ।

अँधेरा रात-भर जग कर गढ़ा करता नया दिनकर
सदा ही नाश के हाथो नया निर्माण होता है ।