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लड़ाइयाँ कैसी न जाने कर रहे हैं हम / शिवशंकर मिश्र

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लड़ाइयाँ कैसी न जाने कर रहे हैं हम
लड़ रहे वे अपनी खातिर, मर रहे हैं हम
हम हैं राजा और हम उन के गुलाम हैं
खाते अपना और उन का भर रहे हैं हम