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लश्कर / सत्यप्रकाश जोशी

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(बेटो रण में जावण सारू घोड़ै माथै सवार होय‘र चालै कै वींरी मा वींनैं रोकण सारू आडी फिरै)

मां - दोरो तो पाळ्यो म्हारा जाया जोध-जवान
दूधड़लो छळकै म्हारै आंचळां
रूक जा रे रूकजा, बळसी जामण कैरो पेट,
एक‘र पोतै रो मूंडो देख लूं

जवान - म्हारा तो थाम्या रे लश्कर ना थमै कोई
भावी रा जायोड़ा लश्कर थामसी ए मा।।
(आगै बधै तो बैन मिले)

बैन - आई रे झूलण आई सावणियै री तीज,
सोनै री भेजूं पाछी घूघरी
रूकजा रे रूकजा वीरा, बैनड़ली रै हेत,
पुणचै तो बांधूं पीळी राखड़ी।

जवान - म्हारा तो थाम्या रे लश्कर ना थमै कोई
भावी रा वीरा लश्कर थामसी ए बैन।।

भोजाई - भाई रे भतीजा थारो जगमग चंदण-चौक,
अबकी होळी रे रंग भर खेलस्यां।
रूक जाओ देवर कोई भावजड़ी रै हेत,
आई मुकळावै भोळी बीनणी।

जवान - म्हारा तो थाम्या रे लश्कर ना थमै कोई
भावी रा देवरिया लश्कर थामसी ए ओ राज।।
(आगै चाल्यां तो बहू मिले)

बहू - गोखै संजोया दीया महाराज बादळ मै‘ल
सुख भर तो पौढौ हिंगळू ढोलियै।
लश्कर तो थामौ राजा चंद घड़ी रा खेल,
कूख तो उडीकै वंस-वधावणौ।।

जवान - म्हारा तो थाम्या रे लश्कर ना थमै कोई
भावी रा भरतारां लश्कर थामसी ए ओ राज।।
(चाल्यौ जावै)