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लाड़ी जी थारे कारने म्हें परपत लांग्या हो राज / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

लाड़ी जी थारे कारने म्हें परपत लांग्या हो राज
म्हाने भरदो लाल तमाखूड़ी
थारे किनने कयो थो मोजी डावड़ा
थारी गरजे परवत लांग्या हो राज
लाड़ीजी थारी कारने म्हें रूसविया गोतीड़ा मनाविया हो
म्हाने भरदो लाल तमाखूड़ी
थारे किनने कयो थो मौजी डावड़ा
थारा गरजे गोतीड़ा मनाविया हो राज
म्हें तो नई भरां लाल तमाखूड़ी
म्हारो नाजुक जिवड़ो कांपे हो राज
म्हारो नाजुक चिमटी दाजे हो राज
म्हें तो नई भरां लाल तमाखूड़ी
लाड़ीजी थारे कारने म्हें भम्मर जोड़ी लायो राज
लाड़ीजी थारे कारने म्हें दादाजी की जोड़ी से आयो हो राज
थारे किनने कयो थो मोजी डावड़ा