भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

लोग तर्कों के बीच अटके हैं / प्रताप सोमवंशी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लोग तर्कों के बीच अटके हैं
रास्ते दूर-दूर हट के हैं

तेरे वादों के लंबे मरूथल में
कितने मासूम लोग भटके हैं

सोचता हूं अभाव है या करंट
एक-एक पल हजार झटके हैं

एक तस्वीर कैसे पाओगे
आईने सौ जगह से चटके हैं

आप बोलें जरूर तूफां पर
रहने वाले तो अप तट के हैं