भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

लोहे का घर: पांच / शरद कोकास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

 
जब वह काले कोट वाला
कैफ़ियत मांगेगा तुमसे
बग़ैर टिकट यात्रा की
तुम चुपचाप
हवाले कर दोगे उसके
जेब में पड़ी
बची हुई बोतल
तुम पर तो वैसे ही
थकान हावी है।