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लौह युवक / शिशुपाल सिंह यादव ‘मुकुंद’

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समृद्धि देश की अति होवे
जन सभी ह्रदय से दुःख खोवे
कोई न बड़ा हो छोटा हो
कार्य न कोई भी खोता हो
स्वार्थी,मदान्ध,अवसरवादी,एरिक दल दलने वाला हूँ
मैं युवक लौह का ढाला हूँ, युग अभी बदलने वाला हूँ
मजदूर कृषक का राज रहे
जनता मन में सुख शांति लहे
हर्षित स्वतन्त्र समीर बहे
भारत ऊंचा पद शीघ्र गहे
नित सत्य तत्व की खातिर मैं,काटों पर चलने वाला हूँ
मैं युवक लौह का ढाला हूँ, युग अभी बदलने वाला हूँ
रोटी खातिर गरीब तरसे
सेठो के घर सोना बरसे
लघु दीन धनिक का पद परसे
उन्मादपूर्ण धनपति हर्षे
मैं सृष्टि बदलकर छोडूंगा,मैं खूब मचलने वाले हूँ
मैं युवक लौह का ढाला हूँ, युग अभी बदलने वाला हूँ
गिर पड़े गाज सर पर मेरे,
क्रोधित हो मौत मुझे हेरे
दे कालचक्र निशिदिन फेरे
यमराज क्रूर नर्क अँधेरे
मैं अमर राष्ट्र का अमनदीप, आफत सम्हलने वाला हूँ
मैं युवक लौह का ढाला हूँ, युग अभी बदलने वाला हूँ
मैं अपना भाग्य विधाता हूँ
मैं पुण्य राष्ट्र निर्माता हूँ
मैं भारतीय कहलाता हूँ
मैं सत पर बलि-बलि जाता हूँ
अन्यायी का जगती तल से,मैं ताज उलटने वाला हूँ
मैं युवक लौह का ढाला हूँ, युग अभी बदलने वाला हूँ