वक़्त कैसे दिल दुखाने वाले मंज़र दे गया
ज़िंदगी भर के लिए ग़म का समुंदर दे गया
दोस्ती के अर्थ हम क्या ख़ाक समझाएँ उसे
जो हमारी पीठ में पीछे से ख़ंजर दे गया
सूर्य आज़ादी का रौनक़ लाएगा ये थी उमीद
पर फ़क़त धूलों भरा वह तो बवंडर दे गया
मार बेकारी की ऐसी नौजवानों पर पड़ी
दौर ये बेवक़्त उनको अस्थिपंजर दे गया
एक घर के वास्ते तरसा किये हम उम्र-भर
पर मुक़द्दर घर के बदले एक खँडहर दे गया
इस चमन के मालियों की नस्ल ऐसी हो गई
जो भी आया इस चमन को एक बंजर दे गया
एक ही मंज़िल के जब हैं रास्ते मज़हब सभी
मश्विरा लड़ने का हमको कौन आकर दे गया