गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
राज़े-उल्फ़त छुपा के देख लिया / फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
59 bytes added
,
17:27, 9 मार्च 2011
सबकी नज़रें बचा के देख लिया
'फ़ैज़'
,
तक़्मील-ए-ग़म
<ref>दुख की पूर्ति</ref>
भी हो न सकी
इश्क़ को आज़मा के देख लिया
जा के देखा, न जा के देख लिया
</poem>
{{KKMeaning}}
अनिल जनविजय
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader
54,039
edits