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कब लोगों ने अल्फ़ाज़ के / अख़्तर नाज़्मी
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09:33, 1 अप्रैल 2011
मैंने तो कभी फूल मसल कर नहीं फेंके
वैसे तो इरादा नहीं
तोबा
तौबा
शिकनी का
लेकिन अभी टूटे हुए साग़र नहीं फेंके
Kartikey agarwaal khalish
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