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/* ये केसा संसार है */ नया विभाग
मॊरीयॊ पगा कानी दॆख गॆ रॊवै ,
 
== ये केसा संसार है ==
 
 
यॆ कॆसा ससार है,
 
गरीब यहा लाचार है,
 
कुछ लॊगॊ कॆ पास है हीरॆ,
 
कुछ रॊटी बिन बिमार है,
कहतॆ धरती मा सबकी फिर भॆद क्यु बॆसुमार है,
 
ममता तॆरी तु है मा फिर माता क्यु लाचार है,
 
सुनॆ पडॆ है महल यहा फुटपाथॊ पर भरमार है,
 
कुछ बन गयॆ ताज यहा,
 
कुछ दानॆ कॊ मॊहताज है,
 
खुस यहा है पैसॆ सॆ सब,
 
भुखॊ सॆ नाराज है,
 
यॆ कॆसा ससार है,
 
गरीब यहा लाचार है
 
रचना... महावीर जोशी पूलासर