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सूरज चाटी आं धोरां री / सांवर दइया
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14:56, 16 अक्टूबर 2011
उकळै माटी आं धोरां री
सड़कां माथै
सड़क
चाली छोरी
कैवै
बतावै
दौरी घाटी आं धोरां री
बांधै पाटी आं धोरां री
तिरसो
तड़ाछ खा पड़्यो हिरण
एक
मिरगलो मरग्यो
आंख्यां फाटी आं धोरां री
बूंद पड़ै पसवाड़ो फोरै
मुळकै माटी आं धोरां री</poem>
Neeraj Daiya
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