Changes

|रचनाकार=रामनरेश त्रिपाठी
}}
{{KKCatGhazalKKCatKavita}}
<poem>
अतुलनीय जिनके प्रताप का,
साक्षी है प्रतयक्ष प्रत्यक्ष दिवाकर।
घूम घूम कर देख चुका है,
जिनकी निर्मल किर्ति निशाकर।
9
edits