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होंगे वे कोई और / श्रीकृष्ण सरल

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|रचनाकार=श्रीकृष्ण सरल
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होंगे वे कोई और किनारों पर बैठे
 
मैं होड़ लगाया करता हूँ मझधारों से,
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