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अजब अभागों का कुनबा / मनोज कुमार झा
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06:45, 5 नवम्बर 2013
पिट कर चुप जाने से भी कई साथी मिले
एक ने तो कहा कि लड़ाई बहुत वक़्त माँगती है
और उतना वक़्त नहीं होता
अन्धी०
अन्धी
माता के सन्तानों को
हममें से कइयों को जब प्रियों ने तजा
तो मूर्ख कहा और हमने बस इतना सोचा
अनिल जनविजय
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