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कितने रूपों में वे प्रियतम आते नित्य हमारे पास।
देते कभी स्नेह-वत्सलता, देते कभी भयानक त्रास॥
प्रियतमको प्रियतम को पहचान सभीमेंसभी में, करें सभीका नित सत्कार।
उनके सुख-प्रीत्यर्थ करें हम यथायोग्य सारे व्यवहार॥
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