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मुझे याद आते हैं / गजानन माधव मुक्तिबोध
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07:29, 27 जनवरी 2008
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(मोटे अक्षरों में लिखे शब्द अधूरे या ग़लत हैं, आप के पास छपाई में यह कविता पड़ी हो तो ये शब्द ठीक
कर दें, और इस कोष्ठक को मिटा दें।)
आँखों के सामने, दूर...<br>
ढँका हुआ कुहरे से<br>
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Sumitkumar kataria