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बैठता ज़रूर जरूर है
बंदूक पर कबूतर
चाहे एक पल के लिए
चाहे एक पल के लिए
चाहे एक पल के लिए
हमारी भी है
दोस्तो !उस–उस-
एक पल के लिए
चाहें तो
समेट लें
उस पल को
नवजात शिशु की तरह
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