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|रचनाकार=उमेश बहादुरपुरी
|अनुवादक=
|संग्रह=संगम / उमेश बहादुरपुरी
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घरबे के सरग बनइबइ,
गंगाधाम काहे ले जइबइ।जइबइ
काहे ले जइबइ हम काहे ले जइबइ ....
ससुरा शिव हथ सासू जी गौरा,
उनखे डोलइबन रात-दिन चौरा।चौराघरबे में कैलास बनइबइ।बनइबइबाबाधाम काहे ले जइबइ।। जइबइघरबे ...लछुमन जइसन सुंदर देवरवा।देवरवाराम जइसन सइयाँ के चेहरवा।चेहरवाघरबे में अयोध्या बनइबइ।बनइबइअवधधाम काहे ले जइबइ।। जइबइघरबे ....बड़की गोतिनियाँ ओढ़ावे अँचरवा।अँचरवाछोटकी ननदिया लगाबे कजरवा।कजरवाअपन घरबे के चक्कर लगइबइ।लगइबइचारो धाम काहे ले जइबइ।। जइबइघरबे ....
</poem>