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<poem>
दे गईं यादें तिरी क्या ख़ूब नज़राना मुझे?
आ गया हर हाल में अब दिल को बहलाना मुझे।
मुद्दतों के बाद तुम आए हो मेरे सामने,
इस जहाँ में अब न तन्हा छोड़कर जाना मुझे।
 
इस जनम में और कितनी दूरियाँ सहता रहूँ?
छोड़ भी दे इस तरह ऐ यार! तड़पाना मुझे।
 
इस क़दर हैरान हूँ मैं देख तेरी ख़ूबियां,
कह रहे हैं आते-जाते लोग दीवाना मुझे।
 
‘नूर’ अपनी रहमतों की बारिशें तू मुझ पे कर,
अहले-दुनिया ने समझ रक्खा है बेगाना मुझे।
</poem>
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