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घर लौटते हुए / वेणु गोपाल
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15:11, 5 नवम्बर 2008
सारा का सारा शोर-शराबा
उस सुनसान में
सेंधलगानेमें
सेंध लगाने में
नाकामियाब होता हुआ। हमेशा।
फिर भी बाज नहीं आता
अपनी हरकत से।
घर मेरे साथ हमेशा
रहताहै।
रहता है।
मैं
चाहे जिस सड़क पर, चाहे जहाँ रहूँ।
कभी जेब से
अनिल जनविजय
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