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{{KKRachna
|रचनाकार=ल्येफ़ क्रपिवनीत्स्की
|अनुवादक=वरयाम सिंह
|संग्रह=
}}
{{KKCatKavita}}
<poem>
'''(हमारे समय में हर तरह के दुष्ट-जीवन के प्रतिमान हैं — जेम्स हेडली चेज)'''
वहाँ कुछ है भी नहीं ।
सिर्फ़ हवा है ढक्कन लगे बर्तनों के अन्दर
और गर्भधारण किए दो अणु
अवसाद में डूबे हुए —
एक खिलौना-चूल्हा !
कृतज्ञता की बात ही नहीं चली —
कोई ज़रूरत नहीं।
डायन की आँखें ही काफ़ी हैं ।
यदि आप का इतना ही आग्रह है
तो हल्की-सी कॉफ़ी ।
बेकार है पाण्डित्य
भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध
इस प्राचीन मन्दिर में :
हर चीज़ के लिए
हर चीज़ के विषय में
कठोरता का हताश दर्शन ।
फिर पूछा ही क्यों जाता है
प्रतिभाहीन दैत्यों के परम हर्ष का रहस्य ?
बेकार, अर्थहीन… (ऐसी व्याख्याएँ हुई हैं) —
प्रकट होगी घास
या कुछ और नया
फ़ोन करना कभी भी ।
फेफड़ों में पानी नहीं पाया गया
न ही कोई ज़हर ।
नये क्षितिज देखने की कामना करते हुए
खड़ा होना होगा चार पॉवों पर
(सब कुछ बताने का अवसर आएगा) ।
'''मूल रूसी से अनुवाद : वरयाम सिंह'''
</poem>
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|अनुवादक=वरयाम सिंह
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'''(हमारे समय में हर तरह के दुष्ट-जीवन के प्रतिमान हैं — जेम्स हेडली चेज)'''
वहाँ कुछ है भी नहीं ।
सिर्फ़ हवा है ढक्कन लगे बर्तनों के अन्दर
और गर्भधारण किए दो अणु
अवसाद में डूबे हुए —
एक खिलौना-चूल्हा !
कृतज्ञता की बात ही नहीं चली —
कोई ज़रूरत नहीं।
डायन की आँखें ही काफ़ी हैं ।
यदि आप का इतना ही आग्रह है
तो हल्की-सी कॉफ़ी ।
बेकार है पाण्डित्य
भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध
इस प्राचीन मन्दिर में :
हर चीज़ के लिए
हर चीज़ के विषय में
कठोरता का हताश दर्शन ।
फिर पूछा ही क्यों जाता है
प्रतिभाहीन दैत्यों के परम हर्ष का रहस्य ?
बेकार, अर्थहीन… (ऐसी व्याख्याएँ हुई हैं) —
प्रकट होगी घास
या कुछ और नया
फ़ोन करना कभी भी ।
फेफड़ों में पानी नहीं पाया गया
न ही कोई ज़हर ।
नये क्षितिज देखने की कामना करते हुए
खड़ा होना होगा चार पॉवों पर
(सब कुछ बताने का अवसर आएगा) ।
'''मूल रूसी से अनुवाद : वरयाम सिंह'''
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