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सात बहिन घर आइत
-जाइत ,मुख सुखला ,थक भइला ,
साँझ परिल तो माँगि बिदा भइया आपुन घर गइला !
अगिल भोर पनघट पर हँसि
-हँसि बतियइली सतबहिनी !
हमका दिहिन भैया सतरँग लँहगा लहंगा
,हम पाये पियरी चुनरिया ,
सेंदुर
-बिछिया हमका मिलिगा ,हम बाहँन बाँहन भर चुरियाँ ! भोजन पानी कौने कीन्हेल अब बूझैं सतबहिनी !
का पकवान खिलावा री जिजिया ?
-रोइ सतबहिनी !
' तुम ना खबाएल जेठी ?', 'तू का किहिल कनइठी?' इक दूसर सों कहलीं
एकल हमार भइया
, कोऊ तओ न पुछली सब पछताइतत रहिलीं !
साँझ सकारे नित चिचिहाव मचावें गुरगुचियाँ सतबहिनी !