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Kavita Kosh से
<poem>
एक सूरज के थकने के संग
लड़के -बूढ़े.
दिन भर की ख़बरों को खँगालते
चन्द अधेड़
राजनीति के चटखारे लेते
दो-चाह चार गिरगिट
लाचार अशिक्षित
जागा है आधी रात तक