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नव्य न्याय का अनुशासन-2 / लक्ष्मीकांत वर्मा
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08:50, 12 मई 2009
[[Category:कविताएँ]]
<poem>
तुम गुलाब
कीक्यारियों मेंआग
की क्यारियों में आग
लगना चाहते हो
लगा दो : किन्तु गुलाब की सुगन्ध बचा लो
तुम हरी-भरी लताओं को लपटों में बदलना चाहते हो
अनिल जनविजय
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