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दूध में दरार पड़ गई / अटल बिहारी वाजपेयी
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16:58, 16 सितम्बर 2009
खेतों में बारूदी गंध,<br>
टुट
टूट
गये नानक के छंद<br>सतलुज सहम उठी,
व्याथित
व्यथित
सी बितस्ता है। <br>
वसंत से बहार झड़ गई<br>
दूध में दरार पड़ गई।<br><br>
अनिल जनविजय
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