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Kavita Kosh से
|संग्रह=
}}
{{KKCatKavita}}<Poem>मैं थोड़ा सभ्य हूं
मुझसे ज्यादा सभ्य हैं वे लोग
जिनके साथ मैं काम करता हूं
आह अभिलाषा! मेरी महत्वाकांक्षा!
कितने सभ्य होते होंगे प्रधानमंत्री!</poem>