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{{KKGlobal}}
{{KKRachna
|रचनाकार=मोहम्मद इक़बाल
}}
{{KKcatGhazal}}<poem>सितारों से के आगे जहाँ और भी हैं<br>अभी इश्क़ <ref>प्रेम</ref> के इम्तिहाँ और भी हैं<brref>परीक्षाएँ<br/ref>और भी हैं
ताही तही ज़िन्दगी से नहीं ये फ़ज़ायें<br>यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं<br><br>
कनाक़ना'अत <ref>संतोष </ref>न कर आलम-ए-रंग-ओ-बू पर<brref>इन्द्रीय संसार</ref>परचमन और भी, आशियाँ और भी हैं<brref>घरौंदे<br/ref>और भी हैं
अगर खो गया एक नशेमन तो क्या ग़म<br>मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुगाँ और भी हैंफ़ुग़ाँ<brref>रोने-धोने की जगहें<br/ref>और भी हैं
तू शहीं शाहीं<ref>शाहीन,गिद्ध </ref>है परवाज़ <ref> उड़ना</ref>है काम तेरा<br>तेरे सामने आसमाँ और भी हैं<br><br>
इसी रोज़-ओ-शब <ref> सुबह -शाम के चक्कर</ref>में उलझ कर न रह जा<br>के तेरे ज़मीन-ओ-मकाँ और भी हैं<brref>धरती और मकान<br/ref>और भी हैं
गए दिन की के तन्हा था मैं अंजुमन <ref> महफ़िल</ref>में<br>यहाँ अब मेरे राज़दाँ <ref> रहस्य जानने वाले</ref>और भी हैं  <br><br/poem{{KKMeaning}}