Changes

बला की रौ थी नदीमाने-आबला-पा<ref>पाँव के छाले वालों के पास बैठने वाला</ref>को
पलट के देखना चाहा कि ख़ुद ग़ुबार<ref>धूल</ref>हुए
 
गिला उसी का किया जिससे तुझ पे हर्फ़ आया<ref>इल्ज़ाम आया</ref>
वगरना<ref>अन्यथा</ref> यूँ तो सितम हम प’ बे-शुमार<ref>अनगिनत</ref> हुए
ये इंतकाम <ref>बदला</ref>भी लेना था ज़िन्दगी को अभी