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<poem>
आबे ज़मज़म से कहा मैंने मिला गंगा से क्यों
क्यों तेरी तीनत <ref>नीयत</ref> में इतनी नातवानी <ref>अक्षमता</ref> आ गई? 
वह लगा कहने कि हज़रत! आप देखें तो ज़रा
बन्द था शीशी में, अब मुझमें रवानी आ गई
</poem>
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