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20:16, 28 फ़रवरी 2010
{{KKGlobal}}{{KKRachna|रचनाकार=इंदीवर}}[[Category:गीत]]<poem>फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, फूल नहीं मेरा दिल की धड़कन बना लिया उनको।हैप्रीयतम मेरे तुम भी लिखना, क्या ये तुम्हारे क़ाबिल हैप्यार छिपा है ख़त में इतना, जितने सागर में मोतीचूम ही लेता हाथ तुम्हारा, पास जो मेरे तुम होतीफूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...
पुतलियों नींद तुम्हें तो आती होगी, क्या देखा तुमने सपनाआँख खुली तो तन्हाई थी, सपना हो न सका अपनातन्हाई हम दूर करेंगे, ले आओ तुम शहनाईप्रीत लगा के भूल न जाना, प्रीत तुम्हीं ने सिखलाईफूल तुम्हें भेजा है ख़त में छुपा लिया उनको।।...
::जिनके चूमे क़दम बहारों ने।ख़त से जी भरता ही नहीं, अब नैन मिले तो चैन मिलेचाँद हमारी अंगना उतरे, कोई तो ऐसी रैन मिले::मुस्करा कर लुभा लिया उनको।।मिलना हो तो कैसे मिलें हम, मिलने की सूरत लिख दो टोलियाँ ढूंढती नैन बिछाये बैठे हैं तारों की।हम, कब आओगे ख़त लिख दो मैंने जब से चुरा लिया उनको।।फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...</poem>