भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आओ रानी / नागार्जुन

6 bytes added, 09:44, 2 मई 2007
बेबस-बेसुध, सूखे-रुखडेरुखडे़,
हम ठहरे तिनकों के टुकडेटुकडे़,
टहनी हो तुम भारी-भरकम डाल की
यह तो नयी नयी दिल्ली है, दिल मेन में इसे उतार लो
एक बात कह दूं मलका, थोडी-सी लाज उधार लो
Anonymous user