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Kavita Kosh से
मैं देता कुछ, रख अधिक, किन्तु जितने पेपर,<br>
सम्मिलित कंठ से गाते मेरी कीर्ति अमर,<br>
लिख अग्रलेख, अथवा छापते विशाल चित्र।<br>
इतना भी नहीं, लक्षपति का भी यदि कुमार<br>