भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
Changes
Kavita Kosh से
|रचनाकार=उदयप्रताप सिंह
}}
{{KKCatKavitaKKCatGhazal}}
<poem>
इन ढालों के दुर्गम पथ पर देखे रोज़ फिसलते लोग ।