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|रचनाकार=कन्हैया लाल सेठिया
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<Poem>
भोर भोर
फरांस पर बेठी लीलटांस
चाणचक ही उड़गी,
आभे रे अणपार लीलास में
जागगी कोई याद
कोई सपनूँ,
ऊँची र ऊँची
उड़ती गई
लारे छुट्ग्यो आलो
मोबी बचिया
अबे बा
कोनी माँ
खाली माता है
</poem>
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