भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

विसवास : दो / विरेन्द्र कुमार ढुंढाडा़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

विसवास
नीं थारो है म्हनै
नी म्हारो है थन्नै
पण हैं विसवास
आपां बिचाळै
जको जोड़ै आपां नै।

कुण भरै साख
आपणै विसवास री
आपां बिचाळै
आ थूं जाणै
का फेर जाणूं म्हैं
नीं थूं म्हनै बतावै
नीं बताऊं म्हूं
बतायां टूटै विसवास
डर है आपां नै
इणी कारण
जीवै विसवास
आपां बिचाळै।