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शिव जी हीरो बनोॅ हो-12 / अच्युतानन्द चौधरी 'लाल'

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निरगुन-राग बरवा-ताल दादरा

नैरहा में हमरोॅ चुनरि भेलै मैली
फाटलै चदरिया मसकि गेलै चोली।।
रूप नै गुन ढंग संग नै सहेली
केना ससुररिया जी जइबै अकेली।।
डोलिया कहार लॅ कॅ पिया जबॅ अइतै
पीन्ही ओढ़ी की जइबै नई रे नवेली।।
घोघटोॅ उठाय पिया मुँह जबॅ देखतै
लाजोॅ सें मरी जइबै दुलहिन अलबेली।।

निरगुन-ताल कहरवा-राग भैरवी

गठरी मंे लागी गेलै हो भॅ देखौ चोर हो
सुतलोॅ छोॅ कैन्हंे भैया होय कॅ विभोर हो।
झीनी रे चदरिया ओढ़ी चलल्हे कोनी ओर हो
मिली लॅ तों सबसें भैया अइभॅ नै बहोर हो।।
छैल्हौं जे चदरिया के पंचरंगी कोर हो
जेन्हैं रंग उड़लै चलल्हे नदिया के ओर हो।।
गांग असनान करी चढ़ल्हॅ खटोर हो
पीन्हीं ओढ़ी चानन के माथा में टिकोर हो।।
ॅलालॅ कहैछौं एक बतिया कठोर हो
चारे दिन के जिनगी भैया चारे दिन के शोर हो।।

भैरवी-दादरा

कोइयो नै जी साथ देवौं चलती के बेरिया
जाय केरोॅ बेरिया चलै केरोॅ बेरिया।।
रुपिया पैसा माल खजाना
कुछ नैछै आपनोॅ, सबछै बेगामोॅ
धन दौलत सब यहीं रही जइथौं
रही जइथौं यहीं तोरोॅ महल अटरिया।।
दुनियां सेंजबॅ नाता छुटथौं
चार कहार मिलि खटिया उठैथौं
सब कोय मिलि कॅ सेजिया रचैथौं
उपरोॅ सें तानी देथौ झीनी चदरिया।।
बेटा बेटी भाय भतीजा
कोय नै छै आपनोॅ सब छै पराया
लालोॅॅ के तॅ बस राम सहइया
काम देथौं एक तोरा राम रघुरैया।।