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शिव जी हीरो बनोॅ हो-39 / अच्युतानन्द चौधरी 'लाल'

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कजरी-ताल दीपचन्दी

केकरा लॅ करबै सिंगार भइया तोरोॅ बबुआ हे ननदी
दुलरुआ हे ननदी।।
बबुआ बलम हमरोॅ रीत पिरीत रति के हाल कछुओ नै जानये जी
बिरहा के आगिन फूंकैछै तन मन केकरा कहबै जी के बतिया
भैया तोरोॅ बबुआ हे ननदी दुलरुआ हे ननदी।।
आधी आधी रतिया के पिछली पहरिया पिउ पिउ पपिहा पुकारयेजी
बगिया में सोलहो सिंगार करी झूलये सखिया जरावये छतिया
भैया तोरोॅ बबुआ हे ननदी दुलरुआ हे ननदी।।
बरखा के रतिया के कारौ रे बदरिया झम झम झम झम बरसयेजी
बिजुरी जे चमकये धड़कये छतिया बरसये निसदिन अंखिया
भेया तोरोॅ बबुआ हे ननदी दुलरुआ हे ननदी।।

कजरी-कहरवा

अरे रामा अइलै नै सांवरिया सावन बीती गेलै ना
बितलै बारी उमिरिया पिया निरमोहिया अइलै ना।।
दादुर बोलये झींगुर झनकये नाचये मोरवा ना
अरे रामा पिउ पिउ पिउ पिउ रटये पपिहरा सालये जियरा ना।।
बरखा के रतिया जुलमी अंधरिया कारी बदरिया ना
अरे रामा चम चम चम चम चमके विजुरिया धड़कये छतिया ना।।
सखि सब हिलि मिलि गावरे कजरी झूलये बगिया ना
अरे रामा सबके बलमुआ अइलै पिया निरमोहिया अइलै ना।।