भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

शोक-समाचार / रामेश्वरलाल खंडेलवाल 'तरुण'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बिजलियों की शिरोरेखाएँ खींच-खींच कर-
नक्षत्रों के अक्षरों में, मेरी ऊष्मिल साँसों ने
जो गीत लिखे थे-
वे अब नहीं रहे!

वही-उसी बहुत पुरानी
पगडंडी के मोड़ पर से वे गुज़र रहे थे,
धूप बड़ी कड़ी थी,
लू लग गई-
बचाये न जा सके!