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संजा फूली आंगणऽ माय / निमाड़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

संजा फूली आंगणऽ माय,
कि पूजणऽ चलो जी।
चांद सूरजऽ दुई भाई,
कि मीलणऽ चलोजी।।
कि जिनका हाथ सोन्ना की तलवार,
कि धोळा घोड़ा पर असवार
कि जिनका माथऽ पचरंग पाग,
कि जिनका गळा मंऽ सतरंग हार।
संजा फूली आंगणऽ माय,
कि पूजणऽ चलोजी।
चांद सूरज दुई भाई,
कि मीलणऽ चलोजी।।