भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सगपण : अेक / राजेन्द्र शर्मा 'मुसाफिर'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धोरौ
ठाह नीं कद
जा बैठ्यौ
आंधी रै साथै
दूजी ठौड़।

बापड़ो रूंख
जीवै तौ है
बिलखती जड़्यां साथै
स्यात आवै पूठौ
कोई धोरौ
आंधी रै साथै
राखै मरजाद
पूरै साध
रूंख री।