ओ चन्दन-वन के
मलयानिल !
सच बोलना,-
सोये थे
नाग सभी,
सहसा तुम
चले तभी ?
वर्ना क्या
शाखों के साथ अभी
तुम्हें भी पड़ता
किरणों में विष घोलना ?
- सच-सच बोलना !
ओ चन्दन-वन के
मलयानिल !
सच बोलना,-
सोये थे
नाग सभी,
सहसा तुम
चले तभी ?
वर्ना क्या
शाखों के साथ अभी
तुम्हें भी पड़ता
किरणों में विष घोलना ?
- सच-सच बोलना !