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समय का मन्थन / रमेश रंजक

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समय का मन्थन किया
विष पी लिया।

मौत की छोटी बहिन
समझी हमेशा ज़िन्दगी
फिर करें क्यों हर किसी से
सड़क चलते बन्दगी

हौसला जब भी हिला
समझा दिया।

चोट अपनों की ज़हर से
कहीं घातक मान जा
नीम यारी की उधारी
नाश कारक मान जा

भूल जा जिसने किया
जो कुछ किया।