भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

समय / संजय शाण्डिल्य

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक दिन
बात-बात में
तुमसे कहा था मैंने
कि जब से हम साथ हैं
मैंने कुछ भी नहीं लिखा है
मेरे जेहन में
कविता नहीं आती

तुमने उस दिन
मेरा हाथ थामकर कहा था
आएगा समय लिखने का
एक दिन सब दुरुस्त हो जाएगा

आज
इतने वर्षों बाद
वाक़ई
सब दुरुस्त हो गया है

अब तुम
मेरे साथ नहीं हो

मेरे साथ
अब रहता है
समय का अपार अन्धकार
जिसमें मैं लिखता हूँ
जिससे मैं लिखता हूँ ।