एक-दूसरे को
काटती हुई सर्पिणी राहें
ढकेलती हुई
ले आयीं-
महानगर से बाहर,
खुली हवा
मन्त्र-फूँकों से
उतारती है
रग-रग में फैला हुआ-
जहर।
एक-दूसरे को
काटती हुई सर्पिणी राहें
ढकेलती हुई
ले आयीं-
महानगर से बाहर,
खुली हवा
मन्त्र-फूँकों से
उतारती है
रग-रग में फैला हुआ-
जहर।