भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सात बहिनिया है देविया शारदा / बघेली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सात बहिनिया है देविया शारदा कोउने का रचौ बिआह हो मां
बड़ी बहिनिया हैं देविया शारदा ओही का रचै बिआह हो मां
कउने दिना कै लगन लिखाये देव कौउने दिना कै बारात हो मां
दुइज परीवा कै लगन लिखायों नौमी केर बरात हो मां
के लख मांगइं डोलहा- बजनिहा के लख संगे बरात हो मां
नौ लख मांगइं डोलिहा- बजनिहा दस लख मांगइं बरात हो मां
आई बरात फरिकावा मेलइ घुमड़इं तबल निशान हो मां
दे माता मोरी छुरिया कटारिया देखि आऊं अपन बरात हो मां
या गांव कै कैसेन रितियां दुलहिन देखइं अपन बरात हो मां
उइं दुलहिनि या जान्या मोही जो दुलहा के संगे जाय हो मां
मड़ये तरी पगरैते मारउं दुलहे के रक्त नहांव हो मां