भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सीता राम सुमर लेवो / निमाड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

    सीता राम सुमर लेवो,
    आरे तजी देवो सब काम

(१) सपना की संपत भई,
    आरे बाध्यो जगराज
    भोर भई उठ जागीयाँ
    आरे जीनका कोण हवाल...
    सीता हो राम...

(२) बिगर पंख को सोरटो,
    आरे उड़ी चलीयो रे आकाश
    रंग रुप वो को कछु नही
    आरे वोक भुख नी प्यास...
    सीता हो राम...

(३) वायो सोनो नही निपजे,
    आरे मोती लग्या रे डाल
    भाग बिना रे मोती ना मीले
    तपस्या बीन राज...
    सीता हो राम...

(४) राजा दशरथ की हो अयोध्या,
    आरे सिर जाया रघुबीरा
    माता हो जीनकी कोशल्याँ
    आरे लक्ष्मण बलवीरा...
    सीता हो राम...

(५) अनहद बाजा हो बाजीया,
    आरे सतगुरु दरबार
    सेन भगत जा की बिनती
    राखो चरण आधार...
    सीता हो राम...