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सुख के साथी / राजेश गोयल

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सुख के साथी बने हजारों, साथी दुःख के बनों तो जानूँ।
उजियारों के कितने साथी, अधियारों के बनों तो जानूँ॥
कब से दूर सुहाने सपने,
टूट गया विश्वास हमारा।
पथरा गई अब आखंे मेरी,
जीवन अब जीने से हारा॥
मेरे सपनों में तुम रहते, साथी दुःख के बनों तो जानूँ।
उजियारों के कितने साथी, अधियारों के बनों तो जानूँ॥
हमें तिमिर ने बहुत छला,
और नहीं छल पायेगा।
बाहर तो बाहर अब भीतर,
उजियारा भर जायेगा॥
मेरे हृदय में तुम बसते, साथी दुःख के बनों तो जानूँ।
उजियारों के कितने साथी, अधियारों के बनों तो जानूँ॥
तन के संग मन भीगेगा,
खुशियोंका अंकुर फूटेगा।
जाने कितनी राह मिलेंगी,
हर राही अपना होगा॥
मेरे गीतों में तुम रहते, साथी दुःख के बनों तो जानूँ।
उजियारों के कितने साथी, अधियारों के बनों तो जानूँ॥