भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सुन कोयल / श्रीउमेश

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सुन कोयल तों मत बोल कुछु
बरसात झमाझम छौ लखनी ।
घनघोर कठोर निनाद करै
स्वर दादुर झिंगुर के झखनी ।।
चुपचाप रहें तरु खोढ़र में
बनि केॅ चिपकें-चिपकें एखनी ।
करिहें मृदु गायन पंचम में,
रितु कन्त वसन्त जगौ जखनी ।।